Tundla News: सरकारी स्कूलों में बढ़ेगी बच्चों की उपस्थिति, BRC में प्रधानाध्यापकों को मिली ट्रेनिंग

Nandani
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फ़िरोज़ाबाद  के टुंडला में  सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने और शिक्षा के स्तर को निजी स्कूलों (Private Schools) के बराबर लाने के लिए शिक्षा विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में, टुंडला के ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) पर प्रधानाध्यापकों (Principals) के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रेनिंग सत्र का आयोजन किया गया। इस ट्रेनिंग में ब्लॉक के सभी सरकारी स्कूलों के मुखियाओं ने भाग लिया।

ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य

दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक, अक्सर देखा जाता है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन (Enrollment) तो हो जाता है, लेकिन वे नियमित रूप से स्कूल नहीं आते। इसी समस्या को दूर करने और पढ़ाई के गिरते स्तर को सुधारने के लिए यह वर्कशॉप रखी गई थी। अधिकारियों का मानना है कि जब तक स्कूल का प्रधानाध्यापक जागरूक नहीं होगा, तब तक स्कूल की स्थिति नहीं सुधरेगी।

  1. बच्चों की हाजिरी (Attendance) पर ज़ोर: शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन बच्चों के घर जाएं जो बहुत  समय से स्कूल नहीं आ रहे हैं। अभिभावकों को जागरूक किया जाए कि शिक्षा उनके बच्चों के भविष्य के लिए कितनी ज़रूरी है।
  2. पढ़ाई का नया और रोचक तरीका: ट्रेनिंग में बताया गया कि बच्चों को केवल किताबों से न पढ़ाया जाए, बल्कि खेल-कूद, कविताओं और TLM (Teaching Learning Material) के माध्यम से सिखाया जाए ताकि पढ़ाई बोझ न लगे।
  3. निपुण भारत मिशन के लक्ष्य: सरकार द्वारा तय किए गए ‘निपुण लक्ष्यों’ को समय पर पूरा करने के लिए प्रधानाध्यापकों को कार्ययोजना (Action Plan) बनाने के लिए कहा गया है। इसमें बच्चों को बुनियादी गणित और भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य है।
  4. स्कूल के माहौल में सुधार: प्रधानाध्यापकों को सलाह दी गई कि वे स्कूल के वातावरण को सुंदर और बच्चों के अनुकूल बनाएं। साफ-सफाई, मिड-डे मील की गुणवत्ता और पेड़-पौधों पर ध्यान देने से बच्चे स्कूल की ओर आकर्षित होते हैं।
  5. अभिभावकों के साथ मीटिंग: हर महीने होने वाली SMC (School Management Committee) की बैठकों को और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई, ताकि स्कूल और गांव के लोगों के बीच एक अच्छा रिश्ता बन सके।
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कार्यशाला के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी लेनी होगी कि उनके स्कूल का हर बच्चा पढ़ाई में आगे रहे। उन्हें यह भी सिखाया गया कि कैसे डिजिटल साधनों (Smart Classes) का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

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